व्हाइट हाउस की दीवारों के पीछे जो चल रहा है, वह साधारण राजनीति नहीं लगता। डोनल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति ने 6 सितंबर 2025 को प्रेस कॉन्फ्रेंस में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ तो की, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट कर दिया कि उनके वर्तमान कदमों से सहमत नहीं हैं। "मैं हमेशा मोदी का दोस्त रहूंगा," उन्होंने कहा, "लेकिन मुझे पसंद नहीं है कि वे अभी क्या कर रहे हैं।" इस विरोधाभासी बयान ने वैश्विक राजनीति में एक नया मोड़ लगा दिया है।
सिर्फ चार दिन बाद, ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर लिखा कि वे अपने "अच्छे दोस्त" मोदी से जल्द बात करना चाहते हैं क्योंकि दोनों देश व्यापार बाधाओं को दूर करने की बातचीत में हैं। लेकिन यहीं पर कहानी रुकती नहीं है। वास्तविकता थोड़ी और कड़वी है।
टैरिफ युद्ध और भारत का सख्त रूख
ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत से आयातित सामान पर 50% का भारी टैरिफ (सीमा शुल्क) लगाया था। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ 25% का दंडात्मक शुल्क (penalty tariff) लागू किया गया। ये आर्थिक दबाव भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव लाए हुए हैं।
इस तनाव के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीन में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलनचीन में भाग लिया। विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम अमेरिका को एक स्पष्ट संदेश था: भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति के तहत चीन और रूस जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सक्रिय रहेगा और अमेरिका पर पूर्ण निर्भर नहीं होगा।
रूस से गहरे होते संबंध: केवल सैन्य तक सीमित नहीं
अमेरिका के दबाव के बावजूद, भारत-रूस संबंध और भी गहरा रहे हैं। एस. जयशंकर, भारतीय विदेश मंत्री की हालिया मॉस्को यात्रा इसका प्रमाण है। वहीं, भारत के驻रूस राजदूत विनय कुमार ने रूसी मीडिया से बातचीत में स्पष्ट शब्दों में कहा कि न तो टैरिफ और न ही प्रतिबंध भारत-रूस की दोस्ती को रोक सकते हैं।
राजदूत कुमार ने बताया कि यह रिश्ता अब केवल सैन्य क्षेत्र तक सीमित नहीं रहा है। Rosatom (रूसी राज्य परमाणु ऊर्जा निगम) तमिलनाडु के कुदंकुलम में 6 परमाणु रिएक्टर स्थापित कर रहा है, जिनमें से 2 पहले ही बिजली उत्पादन शुरू कर चुके हैं। इसके अलावा, ब्रह्मोस मिसाइल परियोजना, जो DRDO और रूसी संस्थाओं के सहयोग से विकसित हुई है, द्विपक्षीय सहयोग का सबसे बेहतरीन उदाहरण है।
ट्रंप की विश्वसनीयता पर सवाल और चीन समझौता
डोनल्ड ट्रंप की राजनीतिक शैली में अक्सर 'U-टर्न' देखने को मिलते हैं। बुधवार को उन्होंने दावा किया कि वॉशिंगटन डी.सी. और बीजिंग के बीच एक व्यापार समझौता हो गया है, जिसमें चीन हाई-टेक उद्योगों के लिए आवश्यक 'रयर अर्थ्स' (rare earths) और मैग्नेट्स की आपूर्ति करेगा। हालांकि, चीनी पक्ष ने सावधानीपूर्वक कहा कि केवल एक 'ढांचे' (framework) पर सहमति बनी है, पूर्ण समझौते पर नहीं।
विश्लेषकों का कहना है कि जब तक समझौते की पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं होती, तब तक इसे व्यापार युद्ध का अंत नहीं माना जा सकता। ट्रंप के ऐसे बड़े दावे—जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध को "पहले दिन" खत्म करना—अक्सर व्यावहारिक योजना के बिना रह जाते हैं, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठते हैं।
ब्रिक्स का एकजुट होना और एलन मस्क विवाद
आर्थिक विशेषज्ञ जेफरी का मत है कि ट्रंप द्वारा लगाए गए अतिरिक्त टैरिफ अमेरिका के लिए हानिकारक साबित हो रहे हैं। इन कदमों ने ब्रिक्स देशों को अभूतपूर्व तरीके से एकजुट कर दिया है। उनका मानना है कि भारत का अमेरिका पर भरोसा टूट चुका है, जिसका परिणाम रणनीतिक और दीर्घकालिक होगा।
इसके अलावा, ट्रंप के अपने निकटतम सहयोगियों के साथ भी दरारें दिखाई दे रही हैं। टेस्ला और SpaceX के CEO एलन मस्क के साथ उनके संबंध खराब हो गए हैं। ट्रंप ने कहा, "मुझे लगता है, हां, अब रिश्ता खत्म हो गया है।" यह बताता है कि उनकी व्यक्तिगत और व्यावसायिक मित्रताएं भी अचानक बदल सकती हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
डोनल्ड ट्रंप ने भारत पर कितना टैरिफ लगाया है?
ट्रंप प्रशासन ने भारत से आयातित सामान पर 50% का सीमा शुल्क लगाया है। इसके अलावा, रूस से तेल खरीदने पर भारत के खिलाफ 25% का दंडात्मक शुल्क (penalty tariff) लागू किया गया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ा है।
भारत-रूस संबंध अब किस स्थिति में हैं?
भारत के राजदूत विनय कुमार के अनुसार, टैरिफ या प्रतिबंधों से भारत-रूस संबंध नहीं रुकेंगे। Rosatom द्वारा कुदंकुलम में 6 परमाणु रिएक्टर बनाने और ब्रह्मोस मिसाइल जैसे सहयोगी परियोजनाएं इस गहरी दोस्ती का प्रमाण हैं।
क्या अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौता हुआ है?
डोनल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि समझौता हो गया है, लेकिन चीनी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि केवल एक 'ढांचे' (framework) पर सहमति बनी है। विश्लेषकों का मानना है कि पूर्ण समझौते की शर्तें अभी सार्वजनिक नहीं हुई हैं।
ब्रिक्स देशों पर ट्रंप की नीतियों का क्या असर हुआ?
आर्थिक विशेषज्ञ जेफरी का कहना है कि ट्रंप के टैरिफ फैसलों ने ब्रिक्स देशों को एकजुट कर दिया है। भारत का अमेरिका पर भरोसा कम हुआ है, जिससे दीर्घकालिक रणनीतिक बदलाव हो सकते हैं।